Sunday, 10 March 2013

नीतीश का तीर थामने को बेताब कांग्रेस का हाथ

congress is trying to woo jdu
भाजपा में मोदी राग बजने से खफा चल रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अब कांग्रेस की निगाहें लगी हैं और उन्हें रिझाने की हर कोशिश की जा रही है।

कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में सरकार से मतभेद गहराने के बाद राज्यपाल देवानंद कुंवर की बिहार राजभवन से विदाई को कांग्रेस का इसी मकसद से उठाया गया कदम माना जा रहा है।

दरअसल, भाजपा में इस समय नमो-नमो का राग बज रहा है। ऐसे में नीतीश कुमार भले ही सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन अंदरखाने खासे खफा बताए जा रहे हैं। मौके की नजाकत भांप कांग्रेस ने नीतीश को अपने खेमे में शामिल करने का सियासी खेल शुरू कर दिया है।

बिहार में खोई जमीन तलाशने में जुटी कांग्रेस को लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान से ज्यादा वजन नीतीश में दिख रहा है। सबसे पहले वित्त मंत्री ने पिछड़े राज्यों का मानक बदलने की बात करके नीतीश की मांग का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन किया।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने पहले ट्वीट करके और फिर संसद के दोनों सदनों में बिहार सरकार के कामकाज की तारीफ की। अब एक कदम और आगे बढ़कर राज्यपाल देवानंद का बिहार से तबादला कर दिया।

गौरतलब है कि सरकार और राजभवन के बीच संबंध खासे तल्खी भरे चल रहे थे। विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में सरकार ने पहले तो हाईकोर्ट की शरण ली। इसके बाद अपनी नाराजगी जाहिर कर दी।

तीन दिन पहले विवि के खर्चों की समीक्षा को एक नया ऑडिट सेल गठित करके सरकार ने साफ कर दिया कि वह राजभवन से दो-दो हाथ करने के मूड में आ गई है। ऐसे में राज्यपाल का तबादला साफ इशारा कर रहा है कि कांग्रेस का हाथ नीतीश का तीर (जद-यू का चुनाव चिह्न) थामने को बेताब है।

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